यदि आप अपनी सास या ससुर के व्यवहार से परेशान हैं तो रोटी पर काली स्याही से सास का नाम लिखकर काली कुतिया को खिला दे इसी तरह काली स्याही से रोटी पर ससुर का नाम लिखकर काले कुत्ते को खिला दें
Wednesday, October 28, 2015
उधार का पैसा वापिस पाने के लिए :- Upay for borrowing money to get back
उधार दिया हुआ पैसा वापस नहीं आ रहा हैं तो होली दहन के दूसरे दिन बचे हुये कोयले से वहीं धरती पर उस व्यक्ति का नाम लिखे तथा उस नाम के उपर हरा रंग इस तरह डाल दें कि पूरा नाम लुप्त हो जाये। इस प्रयोग से वह व्यक्ति शीघ्र धन वापस कर देगा।
Monday, October 26, 2015
पढाई में बाधा :-Upay for Studies
बुध्वार शाम को एक नर एक मादा तोता लेकर, कहे कि हे तोता जैसे हम तुम्हे आजाद कर रहे है उस तरह आप हमे भी बन्ध् नो से आजाद करे हमारी पढाई में जो बाधा हो वह दूर हो जाये हमारे घर में सुख शांति रहे फ़िर दोनो तोते को अप ने हाथो से आजाद कर दे
चांदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। बुधवार को लाल कपड़े की थैली में सौंफ भरकर तकिए के नीचे रखें, साथ ही रविवार को तांबे का सिक्का सफेद या लाल धागे में गले में धारण करें। अच्छे सकारात्मक परिणाम के लिए सूर्यास्त के बाद रात्रि में दूध न लें। दिन में दूध-दही पनीर ले सकते हैं। दही व पनीर रात्रि को भी ले सकते हैं, पर दूध नहीं।
बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो टोटका करें-
शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाईयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। पीछे मुड़कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाएं। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें। यह उपाय माता-पिता भी अपने बच्चे के लिये कर सकते हैं।
बच्चे की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए: शनिवार को रात बारह बजे बच्चे की शिखा के स्थान पर से चार बाल काटकर एक पुड़िया में रख लें, ऐसे शनिवार से अगले शनिवार तक करें, फिर रविवार के दिन इन सभी बालों को इकट्ठा कर चैखट पर रखकर जला दें और पैर की एड़ी से रगड़ दें। ये क्रिया बच्चे की मां करे तो ज्यादा अच्छा, इससे बच्चे की स्मरण शक्ति कुशाग्र हो जाएगी। साथ ही बच्चे से इस मंत्र का जप भी 21 बार नित्य करवाते रहें। ऊँ ह्रीं ऐं सरस्वत्यै नमः।
चांदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। बुधवार को लाल कपड़े की थैली में सौंफ भरकर तकिए के नीचे रखें, साथ ही रविवार को तांबे का सिक्का सफेद या लाल धागे में गले में धारण करें। अच्छे सकारात्मक परिणाम के लिए सूर्यास्त के बाद रात्रि में दूध न लें। दिन में दूध-दही पनीर ले सकते हैं। दही व पनीर रात्रि को भी ले सकते हैं, पर दूध नहीं।
बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो टोटका करें-
शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाईयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। पीछे मुड़कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाएं। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें। यह उपाय माता-पिता भी अपने बच्चे के लिये कर सकते हैं।
बच्चे की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए: शनिवार को रात बारह बजे बच्चे की शिखा के स्थान पर से चार बाल काटकर एक पुड़िया में रख लें, ऐसे शनिवार से अगले शनिवार तक करें, फिर रविवार के दिन इन सभी बालों को इकट्ठा कर चैखट पर रखकर जला दें और पैर की एड़ी से रगड़ दें। ये क्रिया बच्चे की मां करे तो ज्यादा अच्छा, इससे बच्चे की स्मरण शक्ति कुशाग्र हो जाएगी। साथ ही बच्चे से इस मंत्र का जप भी 21 बार नित्य करवाते रहें। ऊँ ह्रीं ऐं सरस्वत्यै नमः।
विदेश जाना चाहते हैं तो यह करें.:- Upay for foreign travel
संक्रांति के दिन, सफेद तिल और थोड़ा गुड़ लें. सूर्यास्त के समय एक मिट्टी के कुल्हड़ में डालकर उस कुल्हड़ को पीपल के एक स्वयं गिरे हुये पत्ते से ढक लें. फिर किसी आक के पौधे की जड़ में रख आएं. आते समय पीछे मुड़कर न देखें. घर में आकर स्नान जरूर कर लें. नहाने के पानी में थोड़ा सा शुद्ध केसर मिला लें.यह प्रयोग अपने गुरू का आशीर्वाद लेकर करें ताकि जल्दी सफलता मिले.
Sunday, October 25, 2015
upay for late marriage : विवाह के उपाय
1) शुक्रवार की रात्रि में 8 छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार को प्रात: स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में इन्हें प्रवाहित कर दें.
2) लड़की के पिता जब जब लड़के वाले के यहाँ विवाह प्रस्ताव लेकर जाए तो लड़की अपनी चोटी खुली रखे और जब तक पिता लौटकर घर न आ जाए तब तक चोटी नहीं बाँधनी चाहिए
3)गुरुवार को केले के वृ्क्ष के सामने गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने के साथ शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. अथा जल भी अर्पित करना चाहिए.
2) लड़की के पिता जब जब लड़के वाले के यहाँ विवाह प्रस्ताव लेकर जाए तो लड़की अपनी चोटी खुली रखे और जब तक पिता लौटकर घर न आ जाए तब तक चोटी नहीं बाँधनी चाहिए
3)गुरुवार को केले के वृ्क्ष के सामने गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने के साथ शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. अथा जल भी अर्पित करना चाहिए.
Wednesday, October 14, 2015
सुख शांति का उपाय :- Upaye for Peace
सरसों के तेल से मिट्टी के जलते दीपक में काली गुंजा के दो दाने डालकर उसे गोधूलि बेला में घर के मुख्य द्वार पर रख दें तो घर में सुख-शांति चिरकाल तक बनी रहेगी। इससे शारीरिक, आर्थिक व सभी प्रकार की बाधाएं भी दूर होती हैं
संतान प्राप्ति का उपाय :- Upaye for Santan Prapti
1. संतान प्राप्ति के लिए पति-पत्नी दोनों को रामेश्वरम् की यात्रा करनी चाहिए तथा वहां सर्प-पूजन करवाना चाहिए। इस कार्य को करने से संतान-दोष समाप्त होता है।
2. स्त्री में कमी के कारण संतान होने में बाधा आ रही हो, तो लाल गाय व बछड़े की सेवा करनी चाहिए। लाल या भूरा कुत्ता पालना भी शुभ रहता है।
3. यदि विवाह के दस या बारह वर्ष बाद भी संतान न हो, तो मदार की जड़ को शुक्रवार को उखाड़ लें। उसे कमर में बांधने से स्त्री अवश्य ही गर्भवती हो जाएगी।
4. जब गर्भ धारण हो गया हो, तो चांदी की एक बांसुरी बनाकर राधा-कृष्ण के मंदिर में पति-पत्नी दोनों गुरुवार के दिन चढ़ायें तो गर्भपात का भय/खतरा नहीं होता।
5. यदि बार-बार गर्भपात होता है, तो शुक्रवार के दिन एक गोमती चक्र लाल वस्त्र में सिलकर गर्भवती महिला के कमर पर बांध दें। गर्भपात नहीं होगा।
6. जिन स्त्रियों के सिर्फ कन्या ही होती है, उन्हें शुक्र मुक्ता पहना दी जाये, तो एक वर्ष के अंदर ही पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी।
7. यदि बच्चे न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिट्टी की हांडी में शहद भरकर श्मशान में दबायें।
8. पीपल की जटा शुक्रवार को काट कर सुखा लें, सूखने के बाद चूर्ण बना लें। उसको प्रदर रोग वाली स्त्री प्रतिदिन एक चम्मच दही के साथ सेवन करें। सातवें दिन तक मासिक धर्म, श्वेत प्रदर तथा कमर दर्द ठीक हो जाएगा।
9. संतान प्राप्ति के लिए इनमें से किसी भी मंत्र का नियमित रूप से एक माला प्रतिदिन पाठ करें।
a) ओऽम् नमो भगवते जगत्प्रसूतये नमः।
b) ओऽम क्लीं गोपाल वेषघाटाय वासुदेवाय हूं फट् स्वाहा।
c) ओऽम नमः शक्तिरूपाय मम् गृहे पुत्रं कुरू कुरू स्वाहा।
d) ओऽम् हीं श्रीं क्लीं ग्लौं।
e) देवकी सुत गोविन्द वासुदेवाय जगत्पते। देहिं ये तनयं कृबज त्यामहं शरणंगत।
कृष्ण के बाल रूप का चित्र लगाएं। लड्डू गोपाल का चित्र या मूर्ति लगाना लाभदायक होता है।
2. स्त्री में कमी के कारण संतान होने में बाधा आ रही हो, तो लाल गाय व बछड़े की सेवा करनी चाहिए। लाल या भूरा कुत्ता पालना भी शुभ रहता है।
3. यदि विवाह के दस या बारह वर्ष बाद भी संतान न हो, तो मदार की जड़ को शुक्रवार को उखाड़ लें। उसे कमर में बांधने से स्त्री अवश्य ही गर्भवती हो जाएगी।
4. जब गर्भ धारण हो गया हो, तो चांदी की एक बांसुरी बनाकर राधा-कृष्ण के मंदिर में पति-पत्नी दोनों गुरुवार के दिन चढ़ायें तो गर्भपात का भय/खतरा नहीं होता।
5. यदि बार-बार गर्भपात होता है, तो शुक्रवार के दिन एक गोमती चक्र लाल वस्त्र में सिलकर गर्भवती महिला के कमर पर बांध दें। गर्भपात नहीं होगा।
6. जिन स्त्रियों के सिर्फ कन्या ही होती है, उन्हें शुक्र मुक्ता पहना दी जाये, तो एक वर्ष के अंदर ही पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी।
7. यदि बच्चे न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिट्टी की हांडी में शहद भरकर श्मशान में दबायें।
8. पीपल की जटा शुक्रवार को काट कर सुखा लें, सूखने के बाद चूर्ण बना लें। उसको प्रदर रोग वाली स्त्री प्रतिदिन एक चम्मच दही के साथ सेवन करें। सातवें दिन तक मासिक धर्म, श्वेत प्रदर तथा कमर दर्द ठीक हो जाएगा।
9. संतान प्राप्ति के लिए इनमें से किसी भी मंत्र का नियमित रूप से एक माला प्रतिदिन पाठ करें।
a) ओऽम् नमो भगवते जगत्प्रसूतये नमः।
b) ओऽम क्लीं गोपाल वेषघाटाय वासुदेवाय हूं फट् स्वाहा।
c) ओऽम नमः शक्तिरूपाय मम् गृहे पुत्रं कुरू कुरू स्वाहा।
d) ओऽम् हीं श्रीं क्लीं ग्लौं।
e) देवकी सुत गोविन्द वासुदेवाय जगत्पते। देहिं ये तनयं कृबज त्यामहं शरणंगत।
कृष्ण के बाल रूप का चित्र लगाएं। लड्डू गोपाल का चित्र या मूर्ति लगाना लाभदायक होता है।
मुकदमे में विजय पाने का उपाय Upaye for Victory in Court Case
मुकदमे में विजय पाने के लिए कचहरी में थोड़े से चावल लेकर जाएं। उन चावलों को कार्यवाही वाले कक्ष के बाहर फेंक दें। लेकिन ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि ऐसा करते समय आपको कोई न देखे, अन्यथा लाभ नहीं होगा।
Monday, October 12, 2015
पुत्र प्राप्ति के उपाय: upay for Son attainment
स्त्री के मासिक धर्म के सोलह दिनों तक के समय को ऋतुकाल कहा जाता है। उस दौरान सम्भोग करने पर ही गर्भ धारण हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही साथ विद्वानों का मानना है कि मासिक धर्म होने पर जो रक्त स्रावित होता है, वह दूषित होता है। इसलिए इस दौरान सेक्स से परहेज करना चाहिए। विद्वानों का विचार है कि इस दौरान सम्भोग करने पर उत्पन्न हुई संतानों में अनेक प्रकार के विकार उत्पन्न्ा हो जाते हैं।
मासिक धर्म के वर्जित चार दिनों के अतिरिक्त शेष बारह दिनों में सम्भोग करने से पैदा होने वाली संतानों में अलग-अलग प्रकार की पृत्ति बताई गयी है। जैसे चौथी रात को सम्भोग करने से कम आयु वाला पुत्र, पांचवी रात्रि से कम आयु वाली ह्रदय रोगी पुत्री, छठी रात से वंश वृद्धि करने वाला पुत्र, 7वीं रात से बांझ पुत्री, 8वीं रात से पिताहंता पुत्र, 9वीं रात से कुल का नाम रौशन करने वाली पुत्री, 10वीं रात से कुल का नाम रौशन करने वाला पुत्र, 11वीं रात से अति सुंदर पुत्री, 12वीं रात से गुणी पुत्र, 13वीं रात से परेशानी उत्पन्न करने वाली पुत्री, 14वीं रात से अत्यंत गुणी पुत्र, 15वीं रात से सौभाग्यशाली पुत्री और 16वीं रात से विद्वान पुत्र पैदा होता है।
मासिक धर्म के 16 दिनों के बाद स्त्री का रज अत्यधिक गर्म हो जाता है और वह पुरूष के वीर्य को जला डालता है। इसलिए इस दौरान संभोग करने से या तो गर्भपात हो जाता है या संतान पैदा होते ही मर जाती है। उस तथाकथित शास्त्रीय जानकारी के अनुसार मासिक धर्म के चौथे दिन के संभोग से अल्पायु और दरिद्र पुत्र, पांचवे दिन से जन्मी सिर्फ लड़की पैदा करने वाली कन्या, छठे दिन से कम आयु का पुत्र, 7वें दिन से बांझ कन्या, 8वें दिन से ऐश्वर्यशाली पुत्र, 9वें दिन से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री, 10वें दिन से चालाक पुत्र, 11वें दिन से चरित्रहीन पुत्री, 12वें दिन से सर्वगुण सम्पन्न पुत्र, 13वें दिन से वर्णशंकर पुत्री, 14वें दिन से श्रेष्ठ पुत्र, 15वें दिन से सौभाग्यवती पुत्री तथा 16वें दिन से सर्वगुण सम्पन्न पुत्र पैदा होता है।
इसके अतिरिक्त 'जन भावनाओं' को दृष्टिगत रखते हुए कुछ टोटके टाइप जानकारी भी दी गयी थी। जैसे ताकतवर और गोरे पुत्र के लिए गर्भवती स्त्री को पलाश के एक पत्ते को लेकर पीसकर गाय के दूध के साथ रोज पीना चाहिए।
मासिक धर्म के वर्जित चार दिनों के अतिरिक्त शेष बारह दिनों में सम्भोग करने से पैदा होने वाली संतानों में अलग-अलग प्रकार की पृत्ति बताई गयी है। जैसे चौथी रात को सम्भोग करने से कम आयु वाला पुत्र, पांचवी रात्रि से कम आयु वाली ह्रदय रोगी पुत्री, छठी रात से वंश वृद्धि करने वाला पुत्र, 7वीं रात से बांझ पुत्री, 8वीं रात से पिताहंता पुत्र, 9वीं रात से कुल का नाम रौशन करने वाली पुत्री, 10वीं रात से कुल का नाम रौशन करने वाला पुत्र, 11वीं रात से अति सुंदर पुत्री, 12वीं रात से गुणी पुत्र, 13वीं रात से परेशानी उत्पन्न करने वाली पुत्री, 14वीं रात से अत्यंत गुणी पुत्र, 15वीं रात से सौभाग्यशाली पुत्री और 16वीं रात से विद्वान पुत्र पैदा होता है।
मासिक धर्म के 16 दिनों के बाद स्त्री का रज अत्यधिक गर्म हो जाता है और वह पुरूष के वीर्य को जला डालता है। इसलिए इस दौरान संभोग करने से या तो गर्भपात हो जाता है या संतान पैदा होते ही मर जाती है। उस तथाकथित शास्त्रीय जानकारी के अनुसार मासिक धर्म के चौथे दिन के संभोग से अल्पायु और दरिद्र पुत्र, पांचवे दिन से जन्मी सिर्फ लड़की पैदा करने वाली कन्या, छठे दिन से कम आयु का पुत्र, 7वें दिन से बांझ कन्या, 8वें दिन से ऐश्वर्यशाली पुत्र, 9वें दिन से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री, 10वें दिन से चालाक पुत्र, 11वें दिन से चरित्रहीन पुत्री, 12वें दिन से सर्वगुण सम्पन्न पुत्र, 13वें दिन से वर्णशंकर पुत्री, 14वें दिन से श्रेष्ठ पुत्र, 15वें दिन से सौभाग्यवती पुत्री तथा 16वें दिन से सर्वगुण सम्पन्न पुत्र पैदा होता है।
इसके अतिरिक्त 'जन भावनाओं' को दृष्टिगत रखते हुए कुछ टोटके टाइप जानकारी भी दी गयी थी। जैसे ताकतवर और गोरे पुत्र के लिए गर्भवती स्त्री को पलाश के एक पत्ते को लेकर पीसकर गाय के दूध के साथ रोज पीना चाहिए।
Thursday, October 8, 2015
समृद्धिदायक कौड़ी - Prosperous cowrie
कौड़ी भगवान शिव के वाहन नंदी को प्रिय है। इसमें भगवान शिव का वास माना जाता है। .। इसके स्पर्श एवं उपयोग से अनेक पापों से छुटकारा मिलता है। इससे दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसे घर में रखने से किसी को नजर दोष नहीं लगता है। कौड़ी के उपयोग से स्नायु रोग, स्त्रियों के रोग, गले के रोग, रक्तचाप, मिरगी, दमा, नेत्र रोग, सिर दर्द आदि कई बीमारियों में लाभ होता है। श्रद्धा-भक्ति से धारण की गई कौड़ी सभी मनोकामनाएं पूरी करती है।
कौड़ी., कौड़ी का ब्रेसलेट धारण करने से जातक को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। उपयोग विधि: श्राद्ध, होलाष्टक, सूतक आदि के माह को छोड़ कर अन्य किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सप्ताह के सोमवार को, सूर्याेदय के समय, उपयोग से लाभ:
किसी भी असाध्य बीमारी में लाभ पाने के लिए निरंतर कौड़ी. धारण करें।
पुत्रादि प्राप्ति एवं उनके सुख के लिए इसे पूजा स्थल में स्थापित कर के शिव के समान पूजा-आराधना करने से लाभ होता है। और जादू, टोने टोटके आदि से छुटकारा मिलता है। यह विशेष तौर पर बच्चे के लिए अति शुभदायक है।
विद्यार्थियों अथवा बौद्धिक कार्यों से संबंधित जातकों को चाहिए कि इसे धारण कर सरस्वती का स्मरण, चिंतन करें इससे आश्चर्यजनक लाभ होगा और मन एकाग्रचित्त होगा।
शुद्धता एवं सावधानी: समृद्धिदायक कौड़ी. की शुद्धता दीर्घ समय तक बनी रहे, इसके लिए जातक को निम्न मंत्र का जप करना चाहिए। ¬ श्रां श्रीं श्रौ सः चंद्रमसे नमः। समृद्धिदायक कौड़ी. को धारण कर के मृतक शरीर के पास, प्रसूति गृह आदि में नहीं जाना चाहिए। भूल से, या अन्य किसी कारण से ब्रे अशुद्ध हो जाने पर उसे पुनः श्रद्धापूर्वक गंगाजल एवं कच्चे दूध में धो कर, सामान्य पूजन के साथ धारण करें
यदि बार-बार धनहानि एवं चोरी आदि की घटनाएं हो रही हों, तो दो कौड़ियां लाल वस्त्र में बांधकर शुक्रवार को तिजोरी में रखें।
कौड़ी., कौड़ी का ब्रेसलेट धारण करने से जातक को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। उपयोग विधि: श्राद्ध, होलाष्टक, सूतक आदि के माह को छोड़ कर अन्य किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सप्ताह के सोमवार को, सूर्याेदय के समय, उपयोग से लाभ:
किसी भी असाध्य बीमारी में लाभ पाने के लिए निरंतर कौड़ी. धारण करें।
पुत्रादि प्राप्ति एवं उनके सुख के लिए इसे पूजा स्थल में स्थापित कर के शिव के समान पूजा-आराधना करने से लाभ होता है। और जादू, टोने टोटके आदि से छुटकारा मिलता है। यह विशेष तौर पर बच्चे के लिए अति शुभदायक है।
विद्यार्थियों अथवा बौद्धिक कार्यों से संबंधित जातकों को चाहिए कि इसे धारण कर सरस्वती का स्मरण, चिंतन करें इससे आश्चर्यजनक लाभ होगा और मन एकाग्रचित्त होगा।
शुद्धता एवं सावधानी: समृद्धिदायक कौड़ी. की शुद्धता दीर्घ समय तक बनी रहे, इसके लिए जातक को निम्न मंत्र का जप करना चाहिए। ¬ श्रां श्रीं श्रौ सः चंद्रमसे नमः। समृद्धिदायक कौड़ी. को धारण कर के मृतक शरीर के पास, प्रसूति गृह आदि में नहीं जाना चाहिए। भूल से, या अन्य किसी कारण से ब्रे अशुद्ध हो जाने पर उसे पुनः श्रद्धापूर्वक गंगाजल एवं कच्चे दूध में धो कर, सामान्य पूजन के साथ धारण करें
यदि बार-बार धनहानि एवं चोरी आदि की घटनाएं हो रही हों, तो दो कौड़ियां लाल वस्त्र में बांधकर शुक्रवार को तिजोरी में रखें।
Wednesday, October 7, 2015
नज़र दोष के उपाय: Upaye for Nazar dosha
1) हनुमान जी के कंधे पर लगा सिंदूर का तिलक करें। नजर दोष से प्रभावित व्यक्ति मंदिर नहीं जाता पाता है तो कोई भी व्यक्ति हनुमान जी के कंधे पर लगा संदूर लाकर पीड़ित व्यक्ति को लगाए तो इससे भी लाभ मिलता है।
2) अगर आप पान खाते हैं तो पान में गुलाब की 7 पंखुड़ियों को डालकर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए पान खाएं। इससे नजर दोष दूर होता है और आपके अंदर सकारात्मक उर्जा का संचार बढ़ जाता है।
3) कोई व्यक्ति नजर दोष से पीड़ित है तो कच्चा दूध पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से सात बार घुमाकर कुत्ते को पिला दें। यह काम शनिवार को करना चाहिए।
4) सात लाल मिर्च, एक चम्मच राई, एक कागज़ में रख कर (7 / 11 / 21 ) बार उसार कर गैस पर रख जला दे. गैस के निचे एक बड़ा कागज़ पहले से ही रख दे ताकि जब कागज जलने के बाद राख उसमे आ गिरे. राख को इकट्ठा कर निचे वाले कागज में समेत कर बाहर फेक दे.
5) पीड़ित व्यक्ति 2 लोंग लेवे अपने ऊपर से 11 बार उसार कर चोराहे पर फ़ेंक दे और पीछे मुड़कर ना देखे. सात दिनों तक लगातार ये उपाय करे.
6) सरसों के तेल में रुई की बत्ती को भिगो कर रख ले. बच्चे को सामने बिठा कर घडी की विपरीत दिशा में सात, ग्यारह या इक्कीस बार घुमा जला दे.
7)एक साबूत नींबू के उपर काली स्याही से 307 लिख दें और उस व्यक्ति के उपर उल्टी तरफ से 7 बार उतारें। इसके पश्चात उसी नींबू को चार भागों में इस प्रकार से काटें कि वह नीचें से जुड़े रहें। और फिर उसी नींबू को घर से बाहर किसी निर्जन स्थान पा फेंक दें। यह उपाय करने से पीडि़त व्यक्ति शीघ्र ही स्वस्थ्य हो जायेगा।
बालको को नजर लग जाने, किसी के भूत बाधाग्रस्त होने अथवा बीमार हो जाने पर झाड-फूंक के साथ ही उतारे भी किए जाते हैं। कोई भी उतारा सर से पैर की ओर सात बार उतारा जाता है। इस उतारे के करने से वह बीमारी अथवा दुष्ट आत्मा उस मिठाई के टुकडे पर आ जाती है और इस उतारे को घर से दूर रख आने पर उसके साथ ही घर से बाहर चली जाती है।
रविवार : इतवार के रोज यदि उतारा करना हो, तो बर्फी से उतारा करे बर्फी गाय को खिला देनी चाहिए।
सोमवार : सोमवार के रोज भी यदि उतारा करना हो, तो उस रोज भी बर्फी के टुकडे से उतारा करके गाय को ही खिलाना चाहिए।
मंगलवार : यदि मंगल के रोज उतारा करने की आवश्यकता पडे, तो उस रोज मोतीचूर के लड्डू से उतारा करना चाहिए और उसे कुत्ते को डालना चाहिए।
बुधवार : बुधवार के रोज यदि उतारा करना हो, तो उस दिन इमरती अथवा मोतीचूर के लड्डू से उतारा करना चाहिए और उसे कुत्ते को डालना चाहिए।
गुरूवार : बृहस्पतिवार के रोज शाम के समय पांच मिठाइयां एक दोने में रखकर उताररा करना चाहिए। उतारा करके उसमें धूपबत्ती और छोटी इलायची रखकर पीपल के पेड की जड में पश्चिम दिशा में रखकर लौट आना चाहिए। उतारा करके आते समय पलटकर नहीं देखना चहिए और न ही रास्ते में किसी से बोलना चाहिए। घर आकर हाथ-पैर धोने के बाद कोई कार्य करना चाहिए।
शुक्रवार : शुक्रवार को यदि उतारा करना हो, तो शाम के समय मोतीचूर के लड्डृ से ही उतारा करके उसे कुत्ते को डालना चाहिए।
शनिवार : शनिवार के दिन इमरती और मोतीचूर के लड्डू से उतार किया जाता है। यदि शनिवार के दिन काला कुत्ता मिले और उसे इमरती डाली जाए तो बहुत अच्छा होता है।
2) अगर आप पान खाते हैं तो पान में गुलाब की 7 पंखुड़ियों को डालकर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए पान खाएं। इससे नजर दोष दूर होता है और आपके अंदर सकारात्मक उर्जा का संचार बढ़ जाता है।
3) कोई व्यक्ति नजर दोष से पीड़ित है तो कच्चा दूध पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से सात बार घुमाकर कुत्ते को पिला दें। यह काम शनिवार को करना चाहिए।
4) सात लाल मिर्च, एक चम्मच राई, एक कागज़ में रख कर (7 / 11 / 21 ) बार उसार कर गैस पर रख जला दे. गैस के निचे एक बड़ा कागज़ पहले से ही रख दे ताकि जब कागज जलने के बाद राख उसमे आ गिरे. राख को इकट्ठा कर निचे वाले कागज में समेत कर बाहर फेक दे.
5) पीड़ित व्यक्ति 2 लोंग लेवे अपने ऊपर से 11 बार उसार कर चोराहे पर फ़ेंक दे और पीछे मुड़कर ना देखे. सात दिनों तक लगातार ये उपाय करे.
6) सरसों के तेल में रुई की बत्ती को भिगो कर रख ले. बच्चे को सामने बिठा कर घडी की विपरीत दिशा में सात, ग्यारह या इक्कीस बार घुमा जला दे.
7)एक साबूत नींबू के उपर काली स्याही से 307 लिख दें और उस व्यक्ति के उपर उल्टी तरफ से 7 बार उतारें। इसके पश्चात उसी नींबू को चार भागों में इस प्रकार से काटें कि वह नीचें से जुड़े रहें। और फिर उसी नींबू को घर से बाहर किसी निर्जन स्थान पा फेंक दें। यह उपाय करने से पीडि़त व्यक्ति शीघ्र ही स्वस्थ्य हो जायेगा।
बालको को नजर लग जाने, किसी के भूत बाधाग्रस्त होने अथवा बीमार हो जाने पर झाड-फूंक के साथ ही उतारे भी किए जाते हैं। कोई भी उतारा सर से पैर की ओर सात बार उतारा जाता है। इस उतारे के करने से वह बीमारी अथवा दुष्ट आत्मा उस मिठाई के टुकडे पर आ जाती है और इस उतारे को घर से दूर रख आने पर उसके साथ ही घर से बाहर चली जाती है।
रविवार : इतवार के रोज यदि उतारा करना हो, तो बर्फी से उतारा करे बर्फी गाय को खिला देनी चाहिए।
सोमवार : सोमवार के रोज भी यदि उतारा करना हो, तो उस रोज भी बर्फी के टुकडे से उतारा करके गाय को ही खिलाना चाहिए।
मंगलवार : यदि मंगल के रोज उतारा करने की आवश्यकता पडे, तो उस रोज मोतीचूर के लड्डू से उतारा करना चाहिए और उसे कुत्ते को डालना चाहिए।
बुधवार : बुधवार के रोज यदि उतारा करना हो, तो उस दिन इमरती अथवा मोतीचूर के लड्डू से उतारा करना चाहिए और उसे कुत्ते को डालना चाहिए।
गुरूवार : बृहस्पतिवार के रोज शाम के समय पांच मिठाइयां एक दोने में रखकर उताररा करना चाहिए। उतारा करके उसमें धूपबत्ती और छोटी इलायची रखकर पीपल के पेड की जड में पश्चिम दिशा में रखकर लौट आना चाहिए। उतारा करके आते समय पलटकर नहीं देखना चहिए और न ही रास्ते में किसी से बोलना चाहिए। घर आकर हाथ-पैर धोने के बाद कोई कार्य करना चाहिए।
शुक्रवार : शुक्रवार को यदि उतारा करना हो, तो शाम के समय मोतीचूर के लड्डृ से ही उतारा करके उसे कुत्ते को डालना चाहिए।
शनिवार : शनिवार के दिन इमरती और मोतीचूर के लड्डू से उतार किया जाता है। यदि शनिवार के दिन काला कुत्ता मिले और उसे इमरती डाली जाए तो बहुत अच्छा होता है।
Tuesday, October 6, 2015
पति को वश में करने का उपाय:Upaye to control/whip-hand Husband
पान के हरे पत्ते पर चंदन और केसर का पाउडर लगाकर दुर्गा माता की मूर्ति/तस्वीर के सामने रखें तथा चंडी स्त्रोत का पाठ करें। पाठ के बाद चंदन और केसर के मिश्रण से माथे पर तिलक लगाएं और पति के सामने जाएं। यदि पति न हो, तो उसके फोटो के सामने जाएं। उस पत्ते को एक जगह संभाल कर रख दें। 43वें दिन सभी एकत्रित पत्तों को जल में प्रवाहित कर दें। आपका पति पूर्णत: आपके वश में रहेगा।
रोगों से मुक्ति का उपाय: Upaye to cure of diseases
रात में पूर्व की ओर अपना सिर करके सोएं। सोते समय एक कटोरी में थोड़ा सा सेंधा नमक रख लें। इससे आपकी बीमारी में लाभ होगा।
माईग्रेन :- मंगलवार को सूर्योदय के समय किसी चौराहे पर जाएं और एक टुकड़ा गुड़ को दांत से दो भागों में बांट कर दो अलग-अलग दिशाओं में फेंक दें। 5 सप्ताह लगातार यह क्रिया करें, माईग्रेन में लाभ होगा।
ब्लड प्रेशर--डिप्रेशन
रविवार के दिन 336 ग्राम दूध अपने सिरहाने रख कर सोएं। सोमवार को सुबह उठकर दूध को पीपल के पेड़ पर चढ़ा दें, 6 रविवार यह क्रिया करें, निश्चित लाभ होगा।
एक रुपये का सिक्का रात को सिरहाने में रख कर सोएं और सुबह उठकर उसे श्मशान के आसपास फेंक दें, रोग से मुक्ति मिल जाएगी।
अगर बीमारी पुरानी हो तो आक के पौधे की जड़ उत्तर दिशा में मुख करके लेकर आकर रखे.
अगर बीमारी में पैसा बहुत खर्च हो रहा हो तो १ हल्दी के गांठ गुरुवार को बहते पानी में बहाएं .
एक मुट्ठी पिसा हुआ नमक लेकर शाम को अपने सिर के ऊपर से तीन बार उतार लें और उसे दरवाजे के बाहर फेंकें। ऐसा तीन दिन लगातार करें। यदि आराम न मिले तो नमक को सिर के ऊपर वार कर शौचालय में डालकर फ्लश चला दें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
यदि आपका बच्चा बीमार है जो भी खाता है उसकी उल्टी कर देता है। एक पान के पत्ते पर एक बूंदी का लड्डू, पांच गुलाब के फूल रखकर बच्चे के ऊपर से सात बार उसार कर चुपचाप किसी मंदिर में रखकर आ जाएं कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा।
माईग्रेन :- मंगलवार को सूर्योदय के समय किसी चौराहे पर जाएं और एक टुकड़ा गुड़ को दांत से दो भागों में बांट कर दो अलग-अलग दिशाओं में फेंक दें। 5 सप्ताह लगातार यह क्रिया करें, माईग्रेन में लाभ होगा।
ब्लड प्रेशर--डिप्रेशन
रविवार के दिन 336 ग्राम दूध अपने सिरहाने रख कर सोएं। सोमवार को सुबह उठकर दूध को पीपल के पेड़ पर चढ़ा दें, 6 रविवार यह क्रिया करें, निश्चित लाभ होगा।
एक रुपये का सिक्का रात को सिरहाने में रख कर सोएं और सुबह उठकर उसे श्मशान के आसपास फेंक दें, रोग से मुक्ति मिल जाएगी।
अगर बीमारी पुरानी हो तो आक के पौधे की जड़ उत्तर दिशा में मुख करके लेकर आकर रखे.
अगर बीमारी में पैसा बहुत खर्च हो रहा हो तो १ हल्दी के गांठ गुरुवार को बहते पानी में बहाएं .
एक मुट्ठी पिसा हुआ नमक लेकर शाम को अपने सिर के ऊपर से तीन बार उतार लें और उसे दरवाजे के बाहर फेंकें। ऐसा तीन दिन लगातार करें। यदि आराम न मिले तो नमक को सिर के ऊपर वार कर शौचालय में डालकर फ्लश चला दें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
यदि आपका बच्चा बीमार है जो भी खाता है उसकी उल्टी कर देता है। एक पान के पत्ते पर एक बूंदी का लड्डू, पांच गुलाब के फूल रखकर बच्चे के ऊपर से सात बार उसार कर चुपचाप किसी मंदिर में रखकर आ जाएं कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा।
Friday, October 2, 2015
राशियों के आधार पर टोटके - Totke Based on Birth Sign
मेष
किसी से कोई वस्तु मुफ्त में न लें।
गज-दंत से निर्मित वस्तु जातक के लिए हानिकारक है।
लाल रंग का रुमाल हमेशा प्रयोग करें।
घर में सोने की जगह मृगचर्म का प्रयोग करें।
दिन ढलने के पश्चात् गेहूं व गुड़ बच्चों में बांटें।
बायें हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।
साधु-संतों, मां व गुरु की सेवा करें।
काले, काने एवं अपाहिज व्यक्तियों से दूर रहें।
मीठी वस्तुओं का व्यापार न करें।
आंगन में नीम का वृक्ष लगाएं।
सदाचार का सदा पालन करें।
रात्रि में सिरहाने एक गिलास पानी भरकर रखें।
सुबह उस जल को किसी गमले में डाल दें।
पुत्र-रत्न के जन्म दिन पर नमकीन वस्तु विशेष रूप से बांटें।
वैदिक नियमों का पालन करें।
बहन, बेटी व बुआ को उपहार में मिठाई दें।
विधवाओं की सहायता करें और आशीर्वाद लें।
मीठी रोटी गाय को खिलाएं।
वृष
परस्त्री का संग न करें।
अति काम-वासना का परित्याग करें।
मूंग की दाल दान करें।
शनिवार को सरसों, अलसी या तिल का तेल दान करें। गौ-दान करें।
अर्द्धांगिनी प्रतिदिन कुछ न कुछ दान करे।
शुक्रवार का उपवास रखें।
दूध, दही, घी व कपूर धर्म स्थानों पर चढ़ाएं।
मुक्तक या वज्रमणि धारण करें।
वस्त्रों में इत्रादि का प्रयोग करें।
सलीकेदार कपड़े धारण करें।
नया जूता-चप्पल जनवरी-फरवरी माह में न खरीदें।
चांदी का छल्ला/प्लेटिनम धारण करें।
चावल-चांदी हमेशा पास रखें।
चांदी का टुकड़ा नीम के पेड़ के नीचे दबाएं।
झूठी गवाही न दें।
प्रतिदिन एक नेक काम करें।
किसी से धोखाधड़ी न करें।
घर में मनी प्लांट लगाएं।
मिथुन
तामसिक भोजन का परित्याग करें।
मछलियों को कैदमुक्त करें।
फिटकरी से दांत साफ करें।
पशु-पक्षी न पालें।
अक्षत और दुग्ध धर्मस्थान में चढ़ाएं।
माता का पूजन करें। 12 वर्ष से छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें।
मूंग भिगोकर कबूतरों को दें। दमे की दवा मुफ्त अस्पताल में दें।
तोता, भेड़ या बकरी न पालें।
सूर्य संबंधी उपचार करें।
गुरु से संबंधित उपचार हर कार्य में सफल होंगे।
घर में मनी प्लांट न लगाएं।
हरे रंगों का इस्तेमाल न करें।
बेल्ट का प्रयोग न करें।
बायें हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।
मिट्टी के बर्तन में दूध भरकर निर्जन स्थान में गाड़ें।
हरे रंग की बोतल में गंगा जल भरकर सुनसान जगह में दबाएं।
कर्क
नदी पार करते समय उसमें तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
माता से चांदी-चावल लेकर पास रखें।
पलंग में तांबे का टुकड़ा लगाएं।
24 वर्ष तक नौकरानी या गाय रखें।
24 वर्ष से पहले गृह-निर्माण करें।
चांदी के बर्तन में दूध-पानी पीएं।
घर की नींव में चांदी की ईंट लगवाएं।
चावल, चांदी व दूध, बेटी या संतान को दें।
गेहूं, गुड़ और तांबा दान करें।
दुर्गा पाठ करें।
कन्यादान में सामान दें।
सफेद वस्तुओं से निर्मित चीजों का व्यापार न करें।
माता की सलाह का पालन करें।
धार्मिक कृत्यों को हमेशा कार्यरूप दें।
तीर्थ स्थानों की यात्रा करने से किसी को न रोकें।
अपना रहस्य किसी को कभी न बताएं।
घर में खरगोश न पालें।
सार्वजनिक तौर से पानी पिलाएं।
सदाचार का पालन करें।
27 वर्ष से पूर्व विवाह न करें।
पितरों के नाम का खाना चिड़ियों को खिलाएं।
सूर्य से संबंधित चीजें धर्म स्थान में दें।
धर्म स्थानों में नंगे पांव जाएं।
यदि आप डॉक्टर हों तो रोगियों को मुफ्त दवा दें।
सिंह
घर के अंतिम हिस्से के बायीं ओर का कमरा अंधेरा रखें।
घर में हैडपंप का प्रयोग करें।
चावल, चांदी व दूध का दान दें।
मुफ्त की कोई चीज न लें।
अखरोट व नारियल-तेल धर्म स्थान में दें।
माता व दादी से कृपा प्राप्त करें।
सूरदास को भोजन कराएं। मद्य-मांसादि का सेवन न करें।
तांबे का सिक्का खाकी धागे में डालकर धारण करें।
सदा सत्य बोलें।
किसी का अहित न करें।
अपने वायदे को निभायें।
वैदिक एवं सदाचार के नियमों का पालन करें।
साला, दामाद एवं भांजे की सेवा करें।
लाल बंदरों को गुड़-गेहूं का भोजन कराएं।
चांदी हमेशा साथ रखें।
कन्या
बेटी को मां जैसा प्यार व स्नेह दें।
पन्ना धारण करें।
पुत्री को चांदी की नथ पहनायें।
छत पर वर्षा का जल रखें।
नवीन वस्त्र धारण करने से पहले उसे नदी के जल से धोयें।
हरे रंग का रुमाल पास रखें।
घर में हरे रंगों का प्रयोग न करें।
घर में तुलसी या मनी प्लांट के पौधे न लगाएं।
मद्यपान का निषेध करें।
शनि से संबंधित उपचार करें।
चौड़े पत्ते वाले पेड़ घर में न लगाएं।
ढक्कन सहित घड़ा नदी में प्रवाहित करें।
भूरे रंग का कुत्ता न पालें।
दुर्गा सप्तमी का पाठ करें।
छोटी कन्याओं से आशीर्वाद लें।
किये गये वायदे को याद रखें और उनका पालन करें।
अपशब्द न बोलें और नही क्रोध करें। बुधवार का उपवास रखें।
हरी वस्तुएं नदी के जल में प्रवाहित करें।
तुला
अपने हिस्से का भोजन पशु-पक्षियों और गाय को खिलाएं।
सास-ससुर से चांदी लेकर रखें।
गौ-मूत्र का पान करें।
पत्नी हमेशा टीका लगाए रखे।
परम पिता पर पूर्ण आस्था रखें।
चौपाये जानवर का व्यवसाय करें।
मक्खन, आलू और दही दान करें।
पत्नी से पुनः पाणिग्रहण करें।
घर में संगीत, बाद्य व नृत्य का परित्याग करें।
वैदिक नियमों का पालन करें।
गौ-ग्रास रोज दें।
माता-पिता की आज्ञा से ही विवाह करें।
पति-पत्नी गुप्त स्थानों (गुप्तांग) को दूध से साफ करें।
स्त्री का हमेशा सम्मान करें।
परिवार की कोई भी स्त्री नंगे पांव न चले।
सफेद गौ को छोड़कर अन्य को ग्रास दें।
दहेज में कांसे के बर्तन अवश्य लें।
परमात्मा के नाम पर कोई दान स्वीकार न करें।
धर्म स्थानों पर जाकर नतमस्तक हों।
घर की बुनियाद में चांदी और शहद डालें।
मद्यपान निषेध रखें।
तवा, चिमटा, चकला और बेलन धर्म स्थान में दें।
घर में पश्चिम दिशा की दीवार कच्ची रखें।
वृश्चिक
तंदूर की मीठी रोटी बनाकर गरीबों को खिलाएं।
पीपल व कीकर के वृक्ष न काटें।
तंदूर की रोटी न खाएं।
किसी से मुफ्त का माल न लें।
भाभी की सेवा करें।
बड़े भाई की अवहेलना न करें।
लाल रुमाल का प्रयोग करें।
मृग व हिरण पालें।
दूध उबलकर जलने न पाये।
अलग-अलग मिट्टी के बर्तनों में शहद और सिंदूर रखकर घर में स्थापित करें।
प्रातःकाल शहद का सेवन करें।
मंगलवार को उपवास रखें।
हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाएं।
शहद, सिंदूर और मसूर की दाल नदी में प्रवाहित करें।
बड़ों की सेवा करें।
मृगचर्म पर रात्रि को शयन करें।
शुद्ध चांदी के बर्तन में भोजन करें।
घर में लाल रंग का प्रयोग अवश्य करें।
गुड़, चीनी या खांड़ चीटिंयों को डालें।
लाल गुलाव दरिया में प्रवाहित करें।
धर्म स्थान में जाकर बूंदी या लड़डू का प्रसाद चढ़ाकर बांटें।
धनु
पीतांबरधारी संतों से दूर रहें।
आभूषण निःसंदेह धारण करें।
धर्म स्थानों में घी, दही, आलू और कपूर दान दें।
भिखारी को निराश न लौटने दें।
गंगाजल का सेवन व उससे स्नान करें।
तीर्थ यात्रा करें। तीर्थ यात्रा के लिए दूसरों की मदद करें।
सदा सत्य बोलें और धार्मिकता का पालन करें।
कार्य शुरु करने से पहले नाक साफ करें।
43 दिन बहते पानी में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
पीला रुमाल हमेशा साथ रखें।
पिता के पलंग व कपड़ों का प्रयोग करें।
झूठी गवाही न दें।
पीपल की सेवा करें।
किसी को न ठगें।
गुरु, साधु तथा पीपल का पूजन करें।
बृहस्पतिवार को व्रत रखें।
हरिवंश पुराण का पाठ करें।
चांदी के बर्तन में हल्दी लगाकर रखें।
पीले फूल वाले पौधे लगाएं।
गरुड़ पुराण का पाठ करें।
ब्राह्मण, साधु एवं कुलगुरु की सेवा करें।
मकर
बंदरों की सेवा करें।
गीली मिट्टी से तिलक करें।
दूध में चीनी मिलाकर बरगद के वृक्ष में डालें।
परायी स्त्री पर नजर न डालें।
असत्य भाषण न करें।
स्लेटी रंग की भैंस पालें।
सर्प को दूध पिलाने के लिए सपेरे को पैसे दें या स्वयं दूध पिलाएं।
मद्यपान का निषेध रखें।
घर के किसी हिस्से को अंधेरा न रखें।
पूर्व दिशा वाले मकान में निवास करें।
केतु संबंधी उपाय कर सकते हैं।
कुएं में दूध डालें।
भैंसों, कौओं और मजदूरों को भोजन दें।
नदी में शराब प्रवाहित करें।
काला, नीला व फिरोजी कपड़ा न धारण करें।
हमेशा अपने पास स्वर्ण या केसर रखें।
अखरोट धर्म स्थान में चढ़ाएं और थोड़ा-बहुत घर में लाकर रखें।
48 वर्ष से पहले घर न बनवाएं।
चमड़े या लोहे की बनी नयी वस्तु न खरीदें।
मिट्टी के बर्तन में शहद भरकर निर्जन स्थान में दबाएं।
बांसुरी में चीनी भरकर सुनसान जगह में गाड़ें।
कुंभ
अपने पास चांदी का टुकड़ा रखें।
सांपों को दूध पिलाने के लिए सपेरे को पैसे दें।
मुखय द्वार पर थोड़ा-बहुत अंधेरा रखें।
छत पर ईंधन आदि न रखें।
बृहस्पति से संबंधित उपाय करें।
48 वर्ष से पहले अपना मकान न बनवाएं।
मांस का भक्षण न करें।
दक्षिण दिशा वाले मकान का परित्याग करें।
मकान में चांदी की ईंट रखें।
घर के अंतिम हिस्से की दीवार पर खिड़की न लगवाएं।
असत्य भाषण न करें।
शनिवार को व्रत रखें।
भैरव मंदिर में शराब चढ़ायें, लेकिन खुद न पिएं।
तेल और शराब का दान करें।
सरसों का तेल रोटी में लगाकर गाय को खिलवाएं।
जेब में छोटी-छोटी चांदी की गोलियां रखें।
दूध से स्नान करें। गेहूं, गुड़ तथा कांसा मंदिर में दान करें।
चांदी का चौकोर टुकड़ा गर्दन में बांधें।
केसर या हल्दी का तिलक करें।
सोना धारण करें।
मीन
किसी से दान या मदद स्वीकार न करें।
अपने भाग्य पर भरोसा करें।
सड़क के सामने गड्ढा न रखें।
केसर और हल्दी का तिलक करें।
बुजुर्गों की सेवा करें व दुर्गा पाठ करें।
किसी के सामने स्नान न करें।
धर्म स्थान में जाकर पूजन करें।
कुल पुरोहित का आशीर्वाद प्राप्त करें।
पीपल के वृक्ष का पूजन करें।
सिर पर शिखा रखें।
संतों की सेवा करने के साथ-साथ धर्म स्थान की सफाई करें।
बृहस्पति से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
स्त्री की सलाह से व्यापार करें।
मंदिर में वस्त्र दान करें।
घर में तुलसी व देव प्रतिमा न रखें।
दीवारों पर चित्र लगा सकते हैं।
सोने को पीले वस्त्र में लपेटकर रखें।
किसी से कोई वस्तु मुफ्त में न लें।
गज-दंत से निर्मित वस्तु जातक के लिए हानिकारक है।
लाल रंग का रुमाल हमेशा प्रयोग करें।
घर में सोने की जगह मृगचर्म का प्रयोग करें।
दिन ढलने के पश्चात् गेहूं व गुड़ बच्चों में बांटें।
बायें हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।
साधु-संतों, मां व गुरु की सेवा करें।
काले, काने एवं अपाहिज व्यक्तियों से दूर रहें।
मीठी वस्तुओं का व्यापार न करें।
आंगन में नीम का वृक्ष लगाएं।
सदाचार का सदा पालन करें।
रात्रि में सिरहाने एक गिलास पानी भरकर रखें।
सुबह उस जल को किसी गमले में डाल दें।
पुत्र-रत्न के जन्म दिन पर नमकीन वस्तु विशेष रूप से बांटें।
वैदिक नियमों का पालन करें।
बहन, बेटी व बुआ को उपहार में मिठाई दें।
विधवाओं की सहायता करें और आशीर्वाद लें।
मीठी रोटी गाय को खिलाएं।
वृष
परस्त्री का संग न करें।
अति काम-वासना का परित्याग करें।
मूंग की दाल दान करें।
शनिवार को सरसों, अलसी या तिल का तेल दान करें। गौ-दान करें।
अर्द्धांगिनी प्रतिदिन कुछ न कुछ दान करे।
शुक्रवार का उपवास रखें।
दूध, दही, घी व कपूर धर्म स्थानों पर चढ़ाएं।
मुक्तक या वज्रमणि धारण करें।
वस्त्रों में इत्रादि का प्रयोग करें।
सलीकेदार कपड़े धारण करें।
नया जूता-चप्पल जनवरी-फरवरी माह में न खरीदें।
चांदी का छल्ला/प्लेटिनम धारण करें।
चावल-चांदी हमेशा पास रखें।
चांदी का टुकड़ा नीम के पेड़ के नीचे दबाएं।
झूठी गवाही न दें।
प्रतिदिन एक नेक काम करें।
किसी से धोखाधड़ी न करें।
घर में मनी प्लांट लगाएं।
मिथुन
तामसिक भोजन का परित्याग करें।
मछलियों को कैदमुक्त करें।
फिटकरी से दांत साफ करें।
पशु-पक्षी न पालें।
अक्षत और दुग्ध धर्मस्थान में चढ़ाएं।
माता का पूजन करें। 12 वर्ष से छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें।
मूंग भिगोकर कबूतरों को दें। दमे की दवा मुफ्त अस्पताल में दें।
तोता, भेड़ या बकरी न पालें।
सूर्य संबंधी उपचार करें।
गुरु से संबंधित उपचार हर कार्य में सफल होंगे।
घर में मनी प्लांट न लगाएं।
हरे रंगों का इस्तेमाल न करें।
बेल्ट का प्रयोग न करें।
बायें हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।
मिट्टी के बर्तन में दूध भरकर निर्जन स्थान में गाड़ें।
हरे रंग की बोतल में गंगा जल भरकर सुनसान जगह में दबाएं।
कर्क
नदी पार करते समय उसमें तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
माता से चांदी-चावल लेकर पास रखें।
पलंग में तांबे का टुकड़ा लगाएं।
24 वर्ष तक नौकरानी या गाय रखें।
24 वर्ष से पहले गृह-निर्माण करें।
चांदी के बर्तन में दूध-पानी पीएं।
घर की नींव में चांदी की ईंट लगवाएं।
चावल, चांदी व दूध, बेटी या संतान को दें।
गेहूं, गुड़ और तांबा दान करें।
दुर्गा पाठ करें।
कन्यादान में सामान दें।
सफेद वस्तुओं से निर्मित चीजों का व्यापार न करें।
माता की सलाह का पालन करें।
धार्मिक कृत्यों को हमेशा कार्यरूप दें।
तीर्थ स्थानों की यात्रा करने से किसी को न रोकें।
अपना रहस्य किसी को कभी न बताएं।
घर में खरगोश न पालें।
सार्वजनिक तौर से पानी पिलाएं।
सदाचार का पालन करें।
27 वर्ष से पूर्व विवाह न करें।
पितरों के नाम का खाना चिड़ियों को खिलाएं।
सूर्य से संबंधित चीजें धर्म स्थान में दें।
धर्म स्थानों में नंगे पांव जाएं।
यदि आप डॉक्टर हों तो रोगियों को मुफ्त दवा दें।
सिंह
घर के अंतिम हिस्से के बायीं ओर का कमरा अंधेरा रखें।
घर में हैडपंप का प्रयोग करें।
चावल, चांदी व दूध का दान दें।
मुफ्त की कोई चीज न लें।
अखरोट व नारियल-तेल धर्म स्थान में दें।
माता व दादी से कृपा प्राप्त करें।
सूरदास को भोजन कराएं। मद्य-मांसादि का सेवन न करें।
तांबे का सिक्का खाकी धागे में डालकर धारण करें।
सदा सत्य बोलें।
किसी का अहित न करें।
अपने वायदे को निभायें।
वैदिक एवं सदाचार के नियमों का पालन करें।
साला, दामाद एवं भांजे की सेवा करें।
लाल बंदरों को गुड़-गेहूं का भोजन कराएं।
चांदी हमेशा साथ रखें।
कन्या
बेटी को मां जैसा प्यार व स्नेह दें।
पन्ना धारण करें।
पुत्री को चांदी की नथ पहनायें।
छत पर वर्षा का जल रखें।
नवीन वस्त्र धारण करने से पहले उसे नदी के जल से धोयें।
हरे रंग का रुमाल पास रखें।
घर में हरे रंगों का प्रयोग न करें।
घर में तुलसी या मनी प्लांट के पौधे न लगाएं।
मद्यपान का निषेध करें।
शनि से संबंधित उपचार करें।
चौड़े पत्ते वाले पेड़ घर में न लगाएं।
ढक्कन सहित घड़ा नदी में प्रवाहित करें।
भूरे रंग का कुत्ता न पालें।
दुर्गा सप्तमी का पाठ करें।
छोटी कन्याओं से आशीर्वाद लें।
किये गये वायदे को याद रखें और उनका पालन करें।
अपशब्द न बोलें और नही क्रोध करें। बुधवार का उपवास रखें।
हरी वस्तुएं नदी के जल में प्रवाहित करें।
तुला
अपने हिस्से का भोजन पशु-पक्षियों और गाय को खिलाएं।
सास-ससुर से चांदी लेकर रखें।
गौ-मूत्र का पान करें।
पत्नी हमेशा टीका लगाए रखे।
परम पिता पर पूर्ण आस्था रखें।
चौपाये जानवर का व्यवसाय करें।
मक्खन, आलू और दही दान करें।
पत्नी से पुनः पाणिग्रहण करें।
घर में संगीत, बाद्य व नृत्य का परित्याग करें।
वैदिक नियमों का पालन करें।
गौ-ग्रास रोज दें।
माता-पिता की आज्ञा से ही विवाह करें।
पति-पत्नी गुप्त स्थानों (गुप्तांग) को दूध से साफ करें।
स्त्री का हमेशा सम्मान करें।
परिवार की कोई भी स्त्री नंगे पांव न चले।
सफेद गौ को छोड़कर अन्य को ग्रास दें।
दहेज में कांसे के बर्तन अवश्य लें।
परमात्मा के नाम पर कोई दान स्वीकार न करें।
धर्म स्थानों पर जाकर नतमस्तक हों।
घर की बुनियाद में चांदी और शहद डालें।
मद्यपान निषेध रखें।
तवा, चिमटा, चकला और बेलन धर्म स्थान में दें।
घर में पश्चिम दिशा की दीवार कच्ची रखें।
वृश्चिक
तंदूर की मीठी रोटी बनाकर गरीबों को खिलाएं।
पीपल व कीकर के वृक्ष न काटें।
तंदूर की रोटी न खाएं।
किसी से मुफ्त का माल न लें।
भाभी की सेवा करें।
बड़े भाई की अवहेलना न करें।
लाल रुमाल का प्रयोग करें।
मृग व हिरण पालें।
दूध उबलकर जलने न पाये।
अलग-अलग मिट्टी के बर्तनों में शहद और सिंदूर रखकर घर में स्थापित करें।
प्रातःकाल शहद का सेवन करें।
मंगलवार को उपवास रखें।
हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाएं।
शहद, सिंदूर और मसूर की दाल नदी में प्रवाहित करें।
बड़ों की सेवा करें।
मृगचर्म पर रात्रि को शयन करें।
शुद्ध चांदी के बर्तन में भोजन करें।
घर में लाल रंग का प्रयोग अवश्य करें।
गुड़, चीनी या खांड़ चीटिंयों को डालें।
लाल गुलाव दरिया में प्रवाहित करें।
धर्म स्थान में जाकर बूंदी या लड़डू का प्रसाद चढ़ाकर बांटें।
धनु
पीतांबरधारी संतों से दूर रहें।
आभूषण निःसंदेह धारण करें।
धर्म स्थानों में घी, दही, आलू और कपूर दान दें।
भिखारी को निराश न लौटने दें।
गंगाजल का सेवन व उससे स्नान करें।
तीर्थ यात्रा करें। तीर्थ यात्रा के लिए दूसरों की मदद करें।
सदा सत्य बोलें और धार्मिकता का पालन करें।
कार्य शुरु करने से पहले नाक साफ करें।
43 दिन बहते पानी में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
पीला रुमाल हमेशा साथ रखें।
पिता के पलंग व कपड़ों का प्रयोग करें।
झूठी गवाही न दें।
पीपल की सेवा करें।
किसी को न ठगें।
गुरु, साधु तथा पीपल का पूजन करें।
बृहस्पतिवार को व्रत रखें।
हरिवंश पुराण का पाठ करें।
चांदी के बर्तन में हल्दी लगाकर रखें।
पीले फूल वाले पौधे लगाएं।
गरुड़ पुराण का पाठ करें।
ब्राह्मण, साधु एवं कुलगुरु की सेवा करें।
मकर
बंदरों की सेवा करें।
गीली मिट्टी से तिलक करें।
दूध में चीनी मिलाकर बरगद के वृक्ष में डालें।
परायी स्त्री पर नजर न डालें।
असत्य भाषण न करें।
स्लेटी रंग की भैंस पालें।
सर्प को दूध पिलाने के लिए सपेरे को पैसे दें या स्वयं दूध पिलाएं।
मद्यपान का निषेध रखें।
घर के किसी हिस्से को अंधेरा न रखें।
पूर्व दिशा वाले मकान में निवास करें।
केतु संबंधी उपाय कर सकते हैं।
कुएं में दूध डालें।
भैंसों, कौओं और मजदूरों को भोजन दें।
नदी में शराब प्रवाहित करें।
काला, नीला व फिरोजी कपड़ा न धारण करें।
हमेशा अपने पास स्वर्ण या केसर रखें।
अखरोट धर्म स्थान में चढ़ाएं और थोड़ा-बहुत घर में लाकर रखें।
48 वर्ष से पहले घर न बनवाएं।
चमड़े या लोहे की बनी नयी वस्तु न खरीदें।
मिट्टी के बर्तन में शहद भरकर निर्जन स्थान में दबाएं।
बांसुरी में चीनी भरकर सुनसान जगह में गाड़ें।
कुंभ
अपने पास चांदी का टुकड़ा रखें।
सांपों को दूध पिलाने के लिए सपेरे को पैसे दें।
मुखय द्वार पर थोड़ा-बहुत अंधेरा रखें।
छत पर ईंधन आदि न रखें।
बृहस्पति से संबंधित उपाय करें।
48 वर्ष से पहले अपना मकान न बनवाएं।
मांस का भक्षण न करें।
दक्षिण दिशा वाले मकान का परित्याग करें।
मकान में चांदी की ईंट रखें।
घर के अंतिम हिस्से की दीवार पर खिड़की न लगवाएं।
असत्य भाषण न करें।
शनिवार को व्रत रखें।
भैरव मंदिर में शराब चढ़ायें, लेकिन खुद न पिएं।
तेल और शराब का दान करें।
सरसों का तेल रोटी में लगाकर गाय को खिलवाएं।
जेब में छोटी-छोटी चांदी की गोलियां रखें।
दूध से स्नान करें। गेहूं, गुड़ तथा कांसा मंदिर में दान करें।
चांदी का चौकोर टुकड़ा गर्दन में बांधें।
केसर या हल्दी का तिलक करें।
सोना धारण करें।
मीन
किसी से दान या मदद स्वीकार न करें।
अपने भाग्य पर भरोसा करें।
सड़क के सामने गड्ढा न रखें।
केसर और हल्दी का तिलक करें।
बुजुर्गों की सेवा करें व दुर्गा पाठ करें।
किसी के सामने स्नान न करें।
धर्म स्थान में जाकर पूजन करें।
कुल पुरोहित का आशीर्वाद प्राप्त करें।
पीपल के वृक्ष का पूजन करें।
सिर पर शिखा रखें।
संतों की सेवा करने के साथ-साथ धर्म स्थान की सफाई करें।
बृहस्पति से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
स्त्री की सलाह से व्यापार करें।
मंदिर में वस्त्र दान करें।
घर में तुलसी व देव प्रतिमा न रखें।
दीवारों पर चित्र लगा सकते हैं।
सोने को पीले वस्त्र में लपेटकर रखें।
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