कौड़ी भगवान शिव के वाहन नंदी को प्रिय है। इसमें भगवान शिव का वास माना जाता है। .। इसके स्पर्श एवं उपयोग से अनेक पापों से छुटकारा मिलता है। इससे दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसे घर में रखने से किसी को नजर दोष नहीं लगता है। कौड़ी के उपयोग से स्नायु रोग, स्त्रियों के रोग, गले के रोग, रक्तचाप, मिरगी, दमा, नेत्र रोग, सिर दर्द आदि कई बीमारियों में लाभ होता है। श्रद्धा-भक्ति से धारण की गई कौड़ी सभी मनोकामनाएं पूरी करती है।
कौड़ी., कौड़ी का ब्रेसलेट धारण करने से जातक को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। उपयोग विधि: श्राद्ध, होलाष्टक, सूतक आदि के माह को छोड़ कर अन्य किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सप्ताह के सोमवार को, सूर्याेदय के समय, उपयोग से लाभ:
किसी भी असाध्य बीमारी में लाभ पाने के लिए निरंतर कौड़ी. धारण करें।
पुत्रादि प्राप्ति एवं उनके सुख के लिए इसे पूजा स्थल में स्थापित कर के शिव के समान पूजा-आराधना करने से लाभ होता है। और जादू, टोने टोटके आदि से छुटकारा मिलता है। यह विशेष तौर पर बच्चे के लिए अति शुभदायक है।
विद्यार्थियों अथवा बौद्धिक कार्यों से संबंधित जातकों को चाहिए कि इसे धारण कर सरस्वती का स्मरण, चिंतन करें इससे आश्चर्यजनक लाभ होगा और मन एकाग्रचित्त होगा।
शुद्धता एवं सावधानी: समृद्धिदायक कौड़ी. की शुद्धता दीर्घ समय तक बनी रहे, इसके लिए जातक को निम्न मंत्र का जप करना चाहिए। ¬ श्रां श्रीं श्रौ सः चंद्रमसे नमः। समृद्धिदायक कौड़ी. को धारण कर के मृतक शरीर के पास, प्रसूति गृह आदि में नहीं जाना चाहिए। भूल से, या अन्य किसी कारण से ब्रे अशुद्ध हो जाने पर उसे पुनः श्रद्धापूर्वक गंगाजल एवं कच्चे दूध में धो कर, सामान्य पूजन के साथ धारण करें
यदि बार-बार धनहानि एवं चोरी आदि की घटनाएं हो रही हों, तो दो कौड़ियां लाल वस्त्र में बांधकर शुक्रवार को तिजोरी में रखें।
कौड़ी., कौड़ी का ब्रेसलेट धारण करने से जातक को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। उपयोग विधि: श्राद्ध, होलाष्टक, सूतक आदि के माह को छोड़ कर अन्य किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सप्ताह के सोमवार को, सूर्याेदय के समय, उपयोग से लाभ:
किसी भी असाध्य बीमारी में लाभ पाने के लिए निरंतर कौड़ी. धारण करें।
पुत्रादि प्राप्ति एवं उनके सुख के लिए इसे पूजा स्थल में स्थापित कर के शिव के समान पूजा-आराधना करने से लाभ होता है। और जादू, टोने टोटके आदि से छुटकारा मिलता है। यह विशेष तौर पर बच्चे के लिए अति शुभदायक है।
विद्यार्थियों अथवा बौद्धिक कार्यों से संबंधित जातकों को चाहिए कि इसे धारण कर सरस्वती का स्मरण, चिंतन करें इससे आश्चर्यजनक लाभ होगा और मन एकाग्रचित्त होगा।
शुद्धता एवं सावधानी: समृद्धिदायक कौड़ी. की शुद्धता दीर्घ समय तक बनी रहे, इसके लिए जातक को निम्न मंत्र का जप करना चाहिए। ¬ श्रां श्रीं श्रौ सः चंद्रमसे नमः। समृद्धिदायक कौड़ी. को धारण कर के मृतक शरीर के पास, प्रसूति गृह आदि में नहीं जाना चाहिए। भूल से, या अन्य किसी कारण से ब्रे अशुद्ध हो जाने पर उसे पुनः श्रद्धापूर्वक गंगाजल एवं कच्चे दूध में धो कर, सामान्य पूजन के साथ धारण करें
यदि बार-बार धनहानि एवं चोरी आदि की घटनाएं हो रही हों, तो दो कौड़ियां लाल वस्त्र में बांधकर शुक्रवार को तिजोरी में रखें।
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